भगवान से भरोसा खत्म करने के लिए अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति जबाबदार हैं । भगवान नही है सब झूट है तो फिर हवा, पानी, रात दिन, , ये सारी दुनिया को कौन चलाता है ।
जन्म हुआ है और जो मृतयु होती हैं, ये सारी दुनिया कौन चलाया करता है । भारतीय संस्कृति में मूर्ति
पूजा का बड़ा महत्व है । अंधश्रद्धा निर्मूलनं समिती के dr. Syam मानव के कुछ लेख पढ़कर मैं नास्तिक बन गया था लेकिन अब मुझे समझ आ गया है कि मैं आस्तिक बनु । आज से मैं भगवान गणपति की, माँ दुर्गाकी आरती करूँगा । और घालीन लोटांगण करके आरती समाप्त करूँगा आज दिनांक 1 जून 2020 से 9 कालीमिर्च लेकर प्राथना करूँगा, अग्नेया पच्छिम नैऋत्य पश्चिम वायव्यां उत्तर ईशान्य पूर्व मैं 8 दिशा और1 ऊपर की ओर 3 बार ओम बोलके फेंकूँगा । अब आप मुझे बताओ कि वे श्रद्धा है या अंधश्रद्धा है । भगवान की आरती करना श्रद्धा है कि अँधाश्रद्धा है । माथेपर तिलक लगाकर घूमना श्रद्धा या अँधाश्रद्धा है
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