Monday, June 29, 2020
लोग दुःखी क्यों होते हैं ।
जिंदगी भगवान की देन हैं । जिस ईस्ट को आप मानते हो उनकी देन हैं । आप ई से अपने अपने हिसाबसे जीते हो । कोई उधार मांगकर कोई उधार देकर । कोई भिक माँगनेकी सोचता है, कोई भिक देने की सोचता है । हर इंसान का जीने का तरीका अलग होता है । कोई सोच समजकर आगे बढ़ो । यहाँ ना कोई छोटा है ना कोई बड़ा है । हर इंसान सुुकून कि जिंदगी जीना चाहते है । कोई भी दुुःखी नही होनाचाहता है इसलिए दुखीी होता है । सुख एक पल का होता हैं, इंसान को लगता है की सुख कम ना हो, ईसी वज़ह से ईनसान ..….... होता है
Tuesday, June 9, 2020
हत्ती से लड़नेवाला, सयाजी कंक
श्री छत्रपति शिवाजी महाराज जब मुस्लिम राजा आदिल शाहसे मिलने गए थे, तब राजा आदिल शाहने दरबार में श्री छत्रपति शिवाजी महाराज जी से कहा कि हमारी पास हत्ती, घोड़े और बहुद मजबूत सैनिक है, तब वहा आये सैनिक सयाजी कंक ने कहा की हमारा 1 सैनिक हत्ती से भी ताकतवर है । राजा आदिल शाह ने कहा कि तुम लढो हमारे हत्ती के साथ, तब आदिल शाहने पागल हत्ती बुलवाया और उसके साथ युद्ध करने को कहा, श्री छत्रपति शिवाजी महाराज के सब सैनिकोंके कहा कि मैं लड़ूंगा, लेकिन आदिल शाहने सयाजी कंक को उस पागल हत्ती के साथ युद्ध करवाया, सैनिक सयाजी कंक ने पागल हत्ती को हरक अपने स्वामी का भरे दरबार में नाम ऊँचा किया । जय भवानी जय श्री छत्रपति शिवाजी महाराज की जय । माँ जगदम्बे ने कभी श्री छत्रपति शिवाजी महाराजजी किसी के आगे झुकने नही दिया इसलिए मैं माँ भवानी का मंदिर बनवाकर पूजा अर्चना करते रहूंगामााँ भवानी मेरी रक्षा जरूर करेंगी, गर्व से कहता हूँ की मैं हिन्दू हु
Monday, June 1, 2020
मैं अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के बैकावेमे आके भगवान को भूल गया था
भगवान से भरोसा खत्म करने के लिए अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति जबाबदार हैं । भगवान नही है सब झूट है तो फिर हवा, पानी, रात दिन, , ये सारी दुनिया को कौन चलाता है । जन्म हुआ है और जो मृतयु होती हैं, ये सारी दुनिया कौन चलाया करता है । भारतीय संस्कृति में मूर्ति पूजा का बड़ा महत्व है । अंधश्रद्धा निर्मूलनं समिती के dr. Syam मानव के कुछ लेख पढ़कर मैं नास्तिक बन गया था लेकिन अब मुझे समझ आ गया है कि मैं आस्तिक बनु । आज से मैं भगवान गणपति की, माँ दुर्गाकी आरती करूँगा । और घालीन लोटांगण करके आरती समाप्त करूँगा
आज दिनांक 1 जून 2020 से 9 कालीमिर्च लेकर प्राथना करूँगा, अग्नेया पच्छिम नैऋत्य पश्चिम वायव्यां उत्तर ईशान्य पूर्व मैं 8 दिशा और1 ऊपर की ओर 3 बार ओम बोलके फेंकूँगा । अब आप मुझे बताओ कि वे श्रद्धा है या अंधश्रद्धा है । भगवान की आरती करना श्रद्धा है कि अँधाश्रद्धा है । माथेपर तिलक लगाकर घूमना श्रद्धा या अँधाश्रद्धा है
Subscribe to:
Posts (Atom)